रिंग सेरेमनी (सगाई): पूजा विधि, सामग्री और शुभ मुहूर्त…

रिंग सेरेमनी (सगाई): पूजा विधि, सामग्री और शुभ मुहूर्त 2026
रिंग सेरेमनी (सगाई) हिंदू विवाह से पूर्व किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण संस्कार है जिसे ‘वाग्दान’ भी कहते हैं। इसमें वर और वधू, परिवार और समाज की उपस्थिति में एक-दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। इस अवसर पर गणेश पूजन, कलश स्थापना और शुभ मुहूर्त में वर-वधू का तिलक किया जाता है।
हिंदू धर्म में विवाह समारोह को एक भव्य उत्सव की तरह मनाया जाता है। भारतीय पद्धति से विवाह का कार्यक्रम कई दिनों तक चलता है जिसमें रोका, गोद भराई, रिंग सेरेमनी (Engagement Puja), हल्दी रस्म, पाणिग्रहण संस्कार और विदाई शामिल हैं। ये सभी संस्कार वर-वधू को ईश्वरीय आशीर्वाद प्रदान करने के लिए किए जाते हैं। आज के इस लेख में हम पारंपरिक विधि, सामग्री और 2026 के शुभ मुहूर्त के बारे में जानेंगे।
सगाई समारोह को विधि-विधान से संपन्न करने के लिए SmartPuja आपको अनुभवी वैदिक पंडित प्रदान करता है।
📅 रिंग सेरेमनी (सगाई) शुभ मुहूर्त 2026
सगाई के लिए सही दिन और समय का चुनाव करना अत्यंत आवश्यक है। नीचे वर्ष 2026 के लिए पंचांग आधारित शुभ तिथियां और नक्षत्र दिए गए हैं:
| महीना (Month) | शुभ तिथियां (Dates) | मुख्य नक्षत्र (Nakshatra) |
|---|---|---|
| जनवरी 2026 | 1, 4, 5, 7, 8, 14, 16, 19, 21, 23, 24, 25, 28, 31 | रोहिणी, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त |
| फरवरी 2026 | 2, 4, 6, 7, 12, 14, 15, 19, 20, 21, 22, 26 | मघा, उत्तरा भाद्रपद, मृगशिरा, रेवती |
| मार्च 2026 | 4, 5, 8, 9, 12, 14, 15, 16, 20, 21, 23, 27, 28, 30 | हस्त, स्वाति, अनुराधा, मृगशिरा |
| अप्रैल 2026 | 2, 3, 4, 8, 9, 12, 13, 15, 19, 20, 23, 24, 26, 29 | उत्तरा आषाढ़ा, रोहिणी, मघा, हस्त |
| मई 2026 | 1, 2, 3, 4, 6, 7, 8, 11, 13, 14 | अनुराधा, स्वाति, रोहिणी, रेवती |
| जून 2026 | 15, 17, 19, 20, 21, 22, 24, 26, 27 | हस्त, स्वाति, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुनी |
| जुलाई 2026 | 1, 2, 4, 5, 6, 8, 9, 11, 12, 15 | उत्तरा भाद्रपद, मघा, रेवती |
| अगस्त – अक्टूबर | चातुर्मास (कोई मुहूर्त नहीं) | – |
| नवम्बर 2026 | 20, 21, 24, 25, 26, 30 | रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा भाद्रपद |
| दिसम्बर 2026 | 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12, 14, 19, 21 | हस्त, स्वाति, उत्तरा आषाढ़ा, श्रवण |
(नोट: सटीक मुहूर्त वर-वधू की कुंडली और स्थान के अनुसार पंडित जी से निकलवाना चाहिए।)
रिंग सेरेमनी क्या है? (What is Ring Ceremony)
भारतीय संस्कृति में विवाह से पूर्व सगाई (Engagement) समारोह किया जाता है। इसे अलग-अलग स्थानों पर तिलक, रोका, या वाग्दान के नाम से जाना जाता है।
- वधू पक्ष द्वारा: कन्या का परिवार वर (दूल्हे) को तिलक लगाकर शगुन देता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि वर का रिश्ता पक्का हो गया है।
- वर पक्ष द्वारा: वर की बहन या बुआ वधू (दुल्हन) को चुनरी ओढ़ाकर और तिलक लगाकर रोका संपन्न करती हैं।
आजकल पश्चिमी प्रभाव के कारण इस रस्म में वर और वधू एक-दूसरे को अंगूठी (Ring) पहनाते हैं, इसीलिए इसे ‘रिंग सेरेमनी’ कहा जाता है।
रिंग सेरेमनी पूजन सामग्री लिस्ट
एक सफल रिंग सेरेमनी के लिए सही सामग्री का होना आवश्यक है। यहाँ पूर्ण सूची दी गई है:
| पूजा सामग्री | सजावट और अन्य |
|---|---|
| रोली, चावल (अक्षत), हल्दी, सिंदूर, चंदन | पान के पत्ते, आम के पत्ते, तुलसी |
| मौली (कलावा), जनेऊ, सुपारी, लौंग, इलायची | फूलों की माला (गुलाब/गेंदा), खुले फूल |
| देशी घी, धूप, अगरबत्ती, कपूर, रुई बत्ती | मिठाई, फल (5 प्रकार), मेवे |
| कलश (मिट्टी/तांबा), नारियल (पानी वाला) | लाल/पीला वस्त्र, चुनरी |
| हवन सामग्री (यदि हवन हो रहा हो) | थाली, लोटा, चम्मच, आसन |
रिंग सेरेमनी (सगाई) पूजा विधि
- आसन ग्रहण: सबसे पहले एक चौकी पर सुंदर वस्त्र बिछाएं। वर को पूर्व दिशा (East) की ओर मुख करके बिठाएं।
- पवित्रीकरण: पंडित जी मंत्रोच्चार के साथ वर और सभी उपस्थित लोगों पर जल छिड़क कर शुद्धिकरण करते हैं।
- गणेश-गौरी पूजन: रिंग सेरेमनी में सबसे पहले भगवान गणेश और माता गौरी का आह्वान और पूजन किया जाता है।
- कलश स्थापना: मंगल प्रतीक के रूप में कलश की स्थापना की जाती है।
- तिलक रस्म: कन्या के पिता या भाई वर के माथे पर तिलक लगाते हैं और अक्षत (चावल) लगाते हैं। उन्हें नारियल और शगुन भेंट करते हैं।
- संकल्प: कन्यादाता (पिता) हाथ में जल और पुष्प लेकर संकल्प मंत्र बोलते हैं और वर को स्वीकार करते हैं।
- वधू का रोका: वर पक्ष की महिलाएं वधू को चुनरी ओढ़ाती हैं, तिलक करती हैं और गोद में मिठाई/फल (गोद भराई) देती हैं।
- अंगूठी पहनाना (Ring Exchange): शुभ मुहूर्त में वर और वधू एक-दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। यह सेरेमनी का मुख्य भाग है।
- आशीर्वाद: अंत में, बड़ों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया जाता है।
ॐ रिंग सेरेमनी के प्रमुख मंत्र
गणेश मंत्र (शुरुआत के लिए):
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
स्वस्ति वाचन (शुभकामना के लिए):
“ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥”
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रिंग सेरेमनी विवाह का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इसे विधि-विधान से संपन्न करने के लिए एक अनुभवी वैदिक पंडित की आवश्यकता होती है। SmartPuja आपको प्रदान करता है:
- अनुभवी पंडित: जो आपकी भाषा (हिंदी, मारवाड़ी, गुजराती, आदि) और रीति-रिवाजों को समझते हैं।
- शुभ मुहूर्त: हम आपकी कुंडली के अनुसार सही समय बताते हैं।
- पूजन सामग्री: हम पूजा की सारी सामग्री साथ लाते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
सगाई में मुख्य रूप से भगवान गणेश, गौरी और कलश पूजन किया जाता है। यह नव-दंपति के सुखमय भविष्य के लिए अनिवार्य है।
सगाई के लिए वर और वधू की राशि और नक्षत्र के आधार पर शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। SmartPuja के ज्योतिषी इसमें आपकी मदद कर सकते हैं।
हाँ, क्योंकि यह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक धार्मिक संस्कार (वाग्दान) है। वैदिक मंत्रों के उच्चारण से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बनता है।









